We value your privacy 🍪

    We use cookies to enhance your browsing experience, serve personalized content, and analyze our traffic. By clicking "Accept All", you consent to our use of cookies. You can customize your preferences or reject non-essential cookies.

    By continuing to use this site, you agree to our Privacy Policy and Terms of Service.

    व्रत कथा और पूजा विधि · देवता: भगवान शिव

    सोमवार व्रत — व्रत कथा और पूजा विधि

    सोमवार व्रत भगवान शिव के लिए हर सप्ताह रखा जाने वाला व्रत है। भक्त स्नान करके “ॐ नमः शिवाय” जपते हुए सफ़ेद फूलों से शिव पूजा करते हैं, शाम को कथा सुनते हैं, और रात को एक बार भोजन (नक्त) करते हैं या पूरा उपवास रखते हैं। स्कंद पुराण श्रावण के सोमवारों की विशेष महिमा बताता है।

    Read in English

    अद्यतन: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

    अगली तिथि

    सोमवार व्रत की अगली तिथि सोमवार, 2 नवंबर 2026 है (4 दिन बाद)। सभी समय नई दिल्ली के हैं; आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

    गणना

    • तिथि कैसे तय हुई — हमारे पंचांग इंजन ने सूर्य-चंद्रमा की वास्तविक स्थिति से तिथि निकाली और व्रत के पारंपरिक नियम (जैसे सूर्योदय, प्रदोष, चंद्रोदय या मध्यरात्रि में तिथि का होना) नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर लगाया। ये तिथियाँ द्रिक पंचांग के नई दिल्ली कैलेंडर से जाँची गई हैं।

    सोमवार व्रत — समय (नई दिल्ली)

    • तिथि (दिनांक): सोमवार, 2 नवंबर 2026
    • सूर्योदय: 06:34
    • सूर्यास्त: 17:35

    आगे की तिथियाँ

    • सोमवार, 2 नवंबर 2026: सोमवार व्रत
      4 दिन बाद
    • सोमवार, 9 नवंबर 2026: सोमवार व्रत
      11 दिन बाद
    • सोमवार, 16 नवंबर 2026: सोमवार व्रत
      18 दिन बाद
    • सोमवार, 23 नवंबर 2026: सोमवार व्रत
      25 दिन बाद

    एक सरल बात

    व्रत श्रद्धा का विषय है, पूर्णता का नहीं। कोई चरण छूट जाए, कोई सामग्री न मिले या भोजन करना पड़े — तो कोई बात नहीं; सच्चे मन से जितना हो सके करें। अस्वस्थ, गर्भवती, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग हल्का व्रत रखें या न रखें, और डॉक्टर से पूछ लें। BornClock कोई पूजा या सामग्री नहीं बेचता।

    सोमवार व्रत क्या है

    सोमवार भगवान शिव का दिन है। स्कंद पुराण के श्रावण मास माहात्म्य में शिव सनत्कुमार से कहते हैं कि सोमवार उनका अपना स्वरूप है, और श्रीकृष्ण तथा धर्मात्मा राजाओं ने यह व्रत रखा।

    स्रोत: Drik Panchang — Shravana Somavara vrat katha (Skanda Purana)

    कथा

    धनिक नाम के एक व्यक्ति की कोई संतान नहीं थी। माता पार्वती के आग्रह पर शिव ने उन्हें पुत्र का वरदान दिया — पर वह पुत्र अल्पायु था। सोमवार व्रत के प्रभाव से उस बालक को लंबी आयु मिली।

    श्रावण सोमवार माहात्म्य यह भी कहता है कि सच्चे मन से जो माँगा जाए वह मिलता है, और माहात्म्य को सुनने मात्र से व्रत का पुण्य मिलता है।

    स्रोत: Drik Panchang — weekday vrat kathas · Drik Panchang — Shravana Somavara vrat katha (Skanda Purana)

    पूजा सामग्री

    • पहनने के लिए स्वच्छ सफ़ेद वस्त्र
    • सफ़ेद फूल (जैसे मालती, मल्लिका)
    • शाम की षोडशोपचार पूजा की सामग्री, यदि आप करते हैं

    स्रोत: Drik Panchang — Shravana Somavara vrat katha (Skanda Purana)

    पूजा विधि — सरल चरण

    1. संकल्प लें — श्रावण के व्रत के लिए श्रावण शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार को — और जितने सोमवार का संकल्प हो, हर सोमवार रखें।
    2. सुबह स्नान करके स्वच्छ सफ़ेद वस्त्र पहनें; दिन भर क्रोध, अहंकार और द्वेष छोड़ें।
    3. “नमः शिवाय” / “ॐ नमः शिवाय” जपते हुए शिव को सफ़ेद फूल अर्पित करें।
    4. शाम को पूजा करें और कथा सुनें।
    5. रात को एक बार भोजन करें (नक्त व्रत), या पूरा उपवास रखें।
    6. संकल्पित सोमवार पूरे होने पर परंपरा से उद्यापन होता है — इसमें पुरोहित मार्गदर्शन कर सकते हैं।

    स्रोत: Drik Panchang — Shravana Somavara vrat katha (Skanda Purana)

    कब पड़ता है और कौन-सा समय

    हर सोमवार। पूजा सुबह स्नान के बाद और फिर शाम को होती है; भोजन रात को। यह पृष्ठ अगला सोमवार नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त के साथ दिखाता है।

    स्रोत: BornClock festival calendar (dates checked against Drik Panchang, New Delhi) · Drik Panchang — Shravana Somavara vrat katha (Skanda Purana)

    परंपराओं में अंतर

    स्कंद पुराण के पाठ में रात को एक भोजन (नक्त) या पूरा उपवास — दोनों विकल्प हैं। श्रावण के सोमवारों के लिए ध्यान दें कि उत्तर भारत में चंद्र मास पूर्णिमा पर (पूर्णिमांत) और गुजरात, महाराष्ट्र व दक्षिण में अमावस्या पर (अमांत) पूरा होता है, इसलिए दोनों पंचांगों में “श्रावण” लगभग दो सप्ताह के अंतर से शुरू होता है — अपने स्थानीय पंचांग को मानें।

    स्रोत: Drik Panchang — Shravana Somavara vrat katha (Skanda Purana) · BornClock festival calendar (dates checked against Drik Panchang, New Delhi)

    मंत्र (अर्थ सहित)

    • ॐ नमः शिवाय

      Om Namah Shivaya

      अर्थ: ॐ, भगवान शिव को नमस्कार।

      कब: षडक्षर मंत्र, फूल अर्पित करते समय जपें; “नमः शिवाय” मूल मंत्र है।

      स्रोत: Drik Panchang — Shravana Somavara vrat katha (Skanda Purana)

    इन शब्दों का अर्थ

    किसी शब्द पर टैप करें — सरल भाषा में अर्थ दिखेगा।

    स्रोत

    ऊपर दी गई कथा और विधि सूचीबद्ध स्रोतों से सरल भाषा में ली गई है; परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलती हैं — आपके परिवार की परंपरा सबसे पहले।

    अन्य व्रत

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    परंपरा से रात को एक बार भोजन (नक्त व्रत), या पूरा उपवास। जो आपके स्वास्थ्य के लिए उचित हो वह चुनें।

    स्कंद पुराण का श्रावण मास माहात्म्य श्रावण के हर सोमवार, शुक्ल पक्ष से आरंभ करके, रखे गए व्रत की महिमा बताता है।

    “ॐ नमः शिवाय” (ॐ, शिव को नमस्कार), सफ़ेद फूल अर्पित करते हुए।