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    व्रत कथा और पूजा विधि · देवता: भगवान सत्यनारायण (विष्णु)

    सत्यनारायण कथा (पूर्णिमा) — व्रत कथा और पूजा विधि

    सत्यनारायण पूजा भगवान सत्यनारायण — सत्य के स्वरूप विष्णु — की उपासना है, जिसका केंद्र कुछ कथाओं (व्रत कथा) को सुनना है। इसका कोई निश्चित दिन नहीं, पर पूर्णिमा विशेष शुभ मानी जाती है; भक्त व्रत रखते हैं और शाम का समय अच्छा माना जाता है ताकि प्रसाद से व्रत खोला जा सके।

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    अद्यतन: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

    अगली तिथि

    कार्तिक पूर्णिमा की अगली तिथि मंगलवार, 24 नवंबर 2026 है (26 दिन बाद)। पूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा विशेष शुभ मानी जाती है। सभी समय नई दिल्ली के हैं; आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

    गणना

    • तिथि कैसे तय हुई — हमारे पंचांग इंजन ने सूर्य-चंद्रमा की वास्तविक स्थिति से तिथि निकाली और व्रत के पारंपरिक नियम (जैसे सूर्योदय, प्रदोष, चंद्रोदय या मध्यरात्रि में तिथि का होना) नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर लगाया। ये तिथियाँ द्रिक पंचांग के नई दिल्ली कैलेंडर से जाँची गई हैं।

    कार्तिक पूर्णिमा — समय (नई दिल्ली)

    • तिथि (दिनांक): मंगलवार, 24 नवंबर 2026
    • पूर्णिमा तिथि: 23:43 (23 नवंबर 2026) – 20:23
    • सूर्यास्त (संध्या पूजा): 17:25
      पूजा सुबह या शाम कभी भी हो सकती है; शाम को अधिक उपयुक्त माना जाता है ताकि प्रसाद से व्रत खोला जा सके।

    आगे की तिथियाँ

    • मंगलवार, 24 नवंबर 2026: कार्तिक पूर्णिमा
      26 दिन बाद
    • बुधवार, 23 दिसंबर 2026: मार्गशीर्ष पूर्णिमा
      55 दिन बाद
    • शुक्रवार, 22 जनवरी 2027: पौष पूर्णिमा
      85 दिन बाद

    एक सरल बात

    व्रत श्रद्धा का विषय है, पूर्णता का नहीं। कोई चरण छूट जाए, कोई सामग्री न मिले या भोजन करना पड़े — तो कोई बात नहीं; सच्चे मन से जितना हो सके करें। अस्वस्थ, गर्भवती, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग हल्का व्रत रखें या न रखें, और डॉक्टर से पूछ लें। BornClock कोई पूजा या सामग्री नहीं बेचता।

    सत्यनारायण पूजा क्या है

    यह भगवान सत्यनारायण की पूजा है, जिन्हें कलियुग के लिए विष्णु का रूप माना जाता है। इसका केंद्र व्रत कथा है — एक गरीब ब्राह्मण, एक लकड़हारे, एक व्यापारी और उसके परिवार, और कुछ संस्करणों में एक राजा की कहानियाँ — जिनका संदेश है कि संकल्प निभाने से सुख मिलता है और भूल जाने पर कष्ट, जब तक संकल्प पूरा न हो।

    सबसे विस्तृत पाठ भविष्य पुराण (प्रतिसर्ग पर्व) में है। जिसे प्रायः “स्कंद पुराण, रेवा खंड” कहा जाता है, वह बांग्ला संस्करणों में मिलता है, और विद्वान उसे बाद में जोड़ा गया भाग मानते हैं।

    स्रोत: Wikipedia — Satyanarayana Puja · Drik Panchang — Satyanarayana vrat katha

    कथा संक्षेप में (भविष्य पुराण के अनुसार)

    बांग्ला रेवा खंड संस्करण में राजा चंद्रचूड़ की कथा नहीं है; उसकी जगह राजा वंशध्वज की कथा है, जो पूजा का अनादर करते हैं, कष्ट पाते हैं और फिर पछताते हैं। संस्करणों में नामों का अंतर है।

    1. नैमिषारण्य में शौनक आदि ऋषि सूत जी से कलियुग के लिए सरल उपासना पूछते हैं; सूत जी सत्यनारायण की पूजा बताते हैं।
    2. मनुष्यों के दुख से व्यथित नारद मुनि भगवान विष्णु के पास जाते हैं, जो उन्हें यह व्रत बताते हैं।
    3. काशी के गरीब ब्राह्मण शतानंद को वृद्ध ब्राह्मण के वेश में भगवान विष्णु यह व्रत बताते हैं, और उनकी दरिद्रता दूर होती है।
    4. शत्रुओं से हारे राजा चंद्रचूड़ शतानंद से यह पूजा सीखते हैं और अपना राज्य वापस पाते हैं।
    5. एक लकड़हारा काशी में यह पूजा देखता है, स्वयं करता है और समृद्ध होता है।
    6. व्यापारी लक्षपति संतान के लिए पूजा का संकल्प लेते हैं, पर उसे अधूरा करते हैं; वे और उनके दामाद एक ऐसी चोरी के लिए बंदी बनते हैं जो उन्होंने की ही नहीं। बेटी कलावती पूजा पूरी करती है और वे मुक्त होते हैं। लक्षपति फिर पूजा भूलते हैं तो उनके जहाज़ डूबते हैं; पत्नी लीलावती खुशी में पूजा अधूरी छोड़ती हैं तो फिर संकट आता है — जब तक वे प्रार्थना करके पूजा पूरी नहीं करतीं, और परिवार फिर से सुखी होता है।

    स्रोत: Wikipedia — Satyanarayana Puja

    पूजा सामग्री

    • सत्यनारायण / विष्णु की प्रतिमा या चित्र (बंगाली घरों में शालिग्राम)
    • प्रसाद (शिरनी) के लिए: गेहूँ का आटा, घी, दूध, केला और चीनी या गुड़ — कुछ परंपराओं में चावल भी
    • पढ़ने या सुनने के लिए कथा की पुस्तक

    स्रोत: Wikipedia — Satyanarayana Puja

    पूजा विधि — सरल चरण

    1. पूजा का संकल्प लें और उस दिन व्रत रखें।
    2. शाम को (सुबह भी ठीक है) भगवान सत्यनारायण की पूजा करें।
    3. परिवार और मित्रों के साथ व्रत कथा पढ़ें या सुनें; भजन-कीर्तन और उत्सव इस परंपरा का हिस्सा हैं।
    4. प्रसाद अर्पित करें, और उसी से व्रत खोलें।

    स्रोत: Drik Panchang — Satyanarayana vrat katha · Wikipedia — Satyanarayana Puja

    कब पड़ता है और कौन-सा समय

    कोई निश्चित दिन नहीं; पूर्णिमा विशेष शुभ मानी जाती है, और शाम का समय अच्छा। हमारा पंचांग पूर्णिमा उस दिन मानता है जिस दिन नई दिल्ली में सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि हो, और यह पृष्ठ उस दिन की पूर्णिमा अवधि और सूर्यास्त दिखाता है।

    स्रोत: BornClock festival calendar (dates checked against Drik Panchang, New Delhi) · Drik Panchang — Satyanarayana vrat katha

    परंपराओं में अंतर

    बंगाल में यह पूजा सत्य पीर से जुड़ी है, जिन्हें हिंदू और मुसलमान दोनों मानते हैं; बिहार और उत्तर भारत में सत्यनारायण की पूजा केवल विष्णु रूप में होती है। यह बंगाल और महाराष्ट्र में विशेष लोकप्रिय है, और आंध्र प्रदेश का अन्नवरम सत्यनारायण मंदिर प्रसिद्ध है। कथा संस्कृत, क्षेत्रीय भाषाओं और कभी-कभी अंग्रेज़ी में भी पढ़ी जाती है।

    स्रोत: Wikipedia — Satyanarayana Puja

    इन शब्दों का अर्थ

    किसी शब्द पर टैप करें — सरल भाषा में अर्थ दिखेगा।

    स्रोत

    ऊपर दी गई कथा और विधि सूचीबद्ध स्रोतों से सरल भाषा में ली गई है; परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलती हैं — आपके परिवार की परंपरा सबसे पहले।

    अन्य व्रत

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    नहीं। इसका कोई निश्चित दिन नहीं; पूर्णिमा बस विशेष शुभ मानी जाती है।

    दोनों ठीक हैं; शाम को अधिक उपयुक्त माना जाता है क्योंकि दिन भर का व्रत प्रसाद से खोला जा सकता है।

    सबसे पूरा संस्करण भविष्य पुराण में है; प्रचलित “स्कंद पुराण, रेवा खंड” संस्करण बांग्ला प्रतियों से आता है और बाद का जोड़ माना जाता है।