प्रदोष व्रत — व्रत कथा और पूजा विधि
प्रदोष व्रत हर पक्ष की त्रयोदशी (13वीं तिथि) को महीने में दो बार किया जाने वाला शिव व्रत है। दिन भर व्रत के बाद पूजा संध्या (प्रदोष काल) में, सूर्यास्त के बाद होती है। सोमवार को पड़े तो सोम प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष और शनिवार को शनि प्रदोष कहलाता है।
अद्यतन: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
अगली तिथि
प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष) की अगली तिथि शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 है (8 दिन बाद)। प्रदोष पूजा 17:33 – 20:10 के बीच। सभी समय नई दिल्ली के हैं; आपके शहर में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
गणना
- तिथि कैसे तय हुई — हमारे पंचांग इंजन ने सूर्य-चंद्रमा की वास्तविक स्थिति से तिथि निकाली और व्रत के पारंपरिक नियम (जैसे सूर्योदय, प्रदोष, चंद्रोदय या मध्यरात्रि में तिथि का होना) नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त पर लगाया। ये तिथियाँ द्रिक पंचांग के नई दिल्ली कैलेंडर से जाँची गई हैं।
प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष) — समय (नई दिल्ली)
- तिथि (दिनांक): शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
- त्रयोदशी तिथि: 10:31 – 10:48 (7 नवंबर 2026)
- प्रदोष पूजा का समय: 17:33 – 20:10
सूर्यास्त से रात के पहले पाँचवें भाग तक, जब तक त्रयोदशी रहे।
आगे की तिथियाँ
- शुक्रवार, 6 नवंबर 2026: प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)
8 दिन बाद - रविवार, 22 नवंबर 2026: प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष)
24 दिन बाद - रविवार, 6 दिसंबर 2026: प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)
38 दिन बाद - सोमवार, 21 दिसंबर 2026: सोम प्रदोष (शुक्ल पक्ष)
53 दिन बाद
एक सरल बात
व्रत श्रद्धा का विषय है, पूर्णता का नहीं। कोई चरण छूट जाए, कोई सामग्री न मिले या भोजन करना पड़े — तो कोई बात नहीं; सच्चे मन से जितना हो सके करें। अस्वस्थ, गर्भवती, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग हल्का व्रत रखें या न रखें, और डॉक्टर से पूछ लें। BornClock कोई पूजा या सामग्री नहीं बेचता।
प्रदोष क्या है
“प्रदोष” रात के आरंभिक भाग — संध्या — को कहते हैं। यह महीने की दोनों त्रयोदशियों, शुक्ल और कृष्ण, को भगवान शिव की उपासना में रखा जाता है। महाशिवरात्रि पर या उससे ठीक पहले पड़ने वाला महा प्रदोष कहलाता है।
स्रोत: Wikipedia — Pradosha · Drik Panchang — Pradosh dates and rule
कथा
स्कंद पुराण में विदर्भ के राजा सत्यरथ की कथा है, जो युद्ध में मारे जाते हैं; रानी वन में पुत्र को जन्म देकर चल बसती हैं, और बालक को उमा नाम की ब्राह्मणी पालती हैं। शांडिल्य ऋषि बताते हैं कि यह कष्ट पिछले जन्म में पूजा में चूक के कारण है, और प्रदोष व्रत बताते हैं, जिससे उनका भाग्य लौट आता है।
उज्जैन की एक कथा में शनिवार की त्रयोदशी (शनि प्रदोष) को नगर घिरा होता है: श्रीखर नाम का बालक और वृद्धि नाम के पुजारी क्षिप्रा तट पर शिव से प्रार्थना करते हैं, शिव ज्योति-स्तंभ के रूप में प्रकट होते हैं, आक्रमणकारी हारते हैं, और शिव वहीं स्वयंभू महाकालेश्वर लिंग के रूप में रहते हैं।
स्रोत: Wikipedia — Pradosha
पूजा सामग्री
- शिवलिंग के अभिषेक के लिए जल (और अन्य सामग्री)
- चंदन और बेलपत्र
- सुगंध, दीपक और नैवेद्य
- रुद्राक्ष और विभूति (भस्म), यदि आप धारण करते हैं
स्रोत: Wikipedia — Pradosha
पूजा विधि — सरल चरण
- दिन भर व्रत रखें।
- सूर्यास्त से लगभग एक घंटा पहले स्नान करें।
- प्रदोष काल में शिव-पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा करें — अभिषेक, चंदन, बेलपत्र, सुगंध, दीप और नैवेद्य।
- पूजा के बाद प्रदोष व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- कुछ लोग पूजा के बाद रात्रि जागरण करते हैं।
स्रोत: Wikipedia — Pradosha
कब पड़ता है और कौन-सा समय
व्रत उस दिन होता है जिस दिन सूर्यास्त के बाद (प्रदोष काल में) त्रयोदशी हो, इसलिए कैलेंडर में यह द्वादशी को भी पड़ सकता है। द्रिक पंचांग त्रयोदशी और प्रदोष काल के मेल को शिव पूजा का सबसे अच्छा समय मानता है; यह पृष्ठ नई दिल्ली के लिए वह समय (सूर्यास्त से रात के पहले पाँचवें भाग तक) दिखाता है। विकिपीडिया सूर्यास्त के लगभग डेढ़ घंटे पहले और बाद तक की परंपरा भी बताता है।
स्रोत: BornClock festival calendar (dates checked against Drik Panchang, New Delhi) · Drik Panchang — Pradosh dates and rule · Wikipedia — Pradosha
परंपराओं में अंतर
दक्षिण भारत के शिव मंदिरों में प्रदोषम् पर नंदी की पूजा होती है, और नंदी पर विराजमान शिव-पार्वती की उत्सव मूर्ति मंदिर परिसर में घुमाई जाती है। उज्जैन में शनि प्रदोष की कथा महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ी है।
स्रोत: Wikipedia — Pradosha
इन शब्दों का अर्थ
किसी शब्द पर टैप करें — सरल भाषा में अर्थ दिखेगा।
स्रोत
- Wikipedia — Pradosha
- Drik Panchang — Pradosh dates and rule
- BornClock festival calendar (dates checked against Drik Panchang, New Delhi)
ऊपर दी गई कथा और विधि सूचीबद्ध स्रोतों से सरल भाषा में ली गई है; परंपराएँ परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलती हैं — आपके परिवार की परंपरा सबसे पहले।
