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    शनि गोचर

    कुंभ राशि साढ़ेसाती — शुरू और खत्म होने की तारीख

    ये तारीखें हर उस व्यक्ति के लिए समान हैं जिसकी चंद्र राशि है कुंभ (Aquarius). सभी तारीखें भारतीय मानक समय (IST) में। English

    आज, 29 अक्टूबर 2026
    कुंभ राशि पर साढ़ेसाती चल रही है — तीसरा चरण — अस्त

    शनि मीन में हैं (कुंभ से दूसरी राशि) — 29 मार्च 2025 से 3 जून 2027 तक। पूरी साढ़ेसाती: 24 जन॰ 2020 – 23 फ़र॰ 2028। यह ज़िम्मेदारी और लगातार प्रयास का समय है, डरने की कोई बात नहीं।

    अगली साढ़ेसाती: 6 मार्च 2049 – 7 अप्रैल 2057 (लगभग 22.4 वर्ष बाद)
    अगली शनि ढैया: 8 अग॰ 2029 – 31 मई 2032 (कंटक शनि (चंद्र से चौथी राशि))

    शनि की स्थिति केवल नीचे दी गई तारीखों पर बदलती है — यह कार्ड पेज खुलते समय आज की तारीख के लिए गणना करता है।

    तीनों चरण, सरल शब्दों में

    साढ़ेसाती लगभग साढ़े सात वर्ष का वह समय है जब शनि आपकी (कुंभ) से पहले, उस पर और उसके बाद की राशि से गुज़रते हैं। इसे ज़िम्मेदारी और लगातार प्रयास का समय समझें — इसमें बनाई गई नींव लंबे समय तक टिकती है।

    शनि मकर में — कुंभ से बारहवीं राशि। परंपरा में इसे ख़र्च, दूरी और नई व्यवस्था बनाने का समय माना जाता है: बजट पर ध्यान, नींद और दिनचर्या ठीक रखना, और ज़िम्मेदारियाँ धीरे-धीरे संभालना।

    शनि कुंभ में — आपकी अपनी चंद्र राशि पर। इसे सबसे ज़्यादा मेहनत माँगने वाला, पर सबसे ज़्यादा परिपक्वता देने वाला चरण माना जाता है: धैर्य, अनुशासन और काम को पूरा करना यहाँ सबसे काम आते हैं।

    शनि मीन में — कुंभ से दूसरी राशि। परंपरा में यह परिवार, बचत और वाणी से जुड़ा चरण है; पहले की मेहनत का फल यहीं से दिखने लगता है। सोच-समझकर बोलना और बचत बनाए रखना अच्छा माना जाता है।

    कुंभ राशि की सभी साढ़ेसाती, 1950–2060

    हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक चलती है। राशि की सीमा के पास होने पर शनि कुछ महीनों के लिए पीछे लौटते हैं — वे पंक्तियाँ अलग दिखाई गई हैं, ताकि हर निकास और दोबारा प्रवेश दिखे।

    अवधि: 2 फ़रवरी 1961 – 7 मार्च 1969
    शनि राशिचरणसेतक
    मकर (बारहवीं)पहला चरण — उदय2 फ़र॰ 196117 सित॰ 1961
    धनु (ग्यारहवीं)बाहर (वक्री कदम) · वक्री होकर वापसी17 सित॰ 19618 अक्टू॰ 1961
    मकर (बारहवीं)पहला चरण — उदय8 अक्टू॰ 196127 जन॰ 1964
    कुंभ (पहली)दूसरा चरण — शिखर27 जन॰ 19649 अप्रैल 1966
    मीन (दूसरी)तीसरा चरण — अस्त9 अप्रैल 19663 नव॰ 1966
    कुंभ (पहली)दूसरा चरण — शिखर · वक्री होकर वापसी3 नव॰ 196620 दिस॰ 1966
    मीन (दूसरी)तीसरा चरण — अस्त20 दिस॰ 196617 जून 1968
    मेष (तीसरी)बाहर (वक्री कदम)17 जून 196828 सित॰ 1968
    मीन (दूसरी)तीसरा चरण — अस्त · वक्री होकर वापसी28 सित॰ 19687 मार्च 1969
    अवधि: 21 मार्च 1990 – 17 अप्रैल 1998
    शनि राशिचरणसेतक
    मकर (बारहवीं)पहला चरण — उदय21 मार्च 199020 जून 1990
    धनु (ग्यारहवीं)बाहर (वक्री कदम) · वक्री होकर वापसी20 जून 199015 दिस॰ 1990
    मकर (बारहवीं)पहला चरण — उदय15 दिस॰ 19905 मार्च 1993
    कुंभ (पहली)दूसरा चरण — शिखर5 मार्च 199315 अक्टू॰ 1993
    मकर (बारहवीं)पहला चरण — उदय · वक्री होकर वापसी15 अक्टू॰ 199310 नव॰ 1993
    कुंभ (पहली)दूसरा चरण — शिखर10 नव॰ 19932 जून 1995
    मीन (दूसरी)तीसरा चरण — अस्त2 जून 199510 अग॰ 1995
    कुंभ (पहली)दूसरा चरण — शिखर · वक्री होकर वापसी10 अग॰ 199516 फ़र॰ 1996
    मीन (दूसरी)तीसरा चरण — अस्त16 फ़र॰ 199617 अप्रैल 1998
    अवधि: 24 जनवरी 2020 – 23 फ़रवरी 2028
    शनि राशिचरणसेतक
    मकर (बारहवीं)पहला चरण — उदय24 जन॰ 202029 अप्रैल 2022
    कुंभ (पहली)दूसरा चरण — शिखर29 अप्रैल 202212 जुल॰ 2022
    मकर (बारहवीं)पहला चरण — उदय · वक्री होकर वापसी12 जुल॰ 202217 जन॰ 2023
    कुंभ (पहली)दूसरा चरण — शिखर17 जन॰ 202329 मार्च 2025
    मीन (दूसरी)तीसरा चरण — अस्तआज29 मार्च 20253 जून 2027
    मेष (तीसरी)बाहर (वक्री कदम)3 जून 202720 अक्टू॰ 2027
    मीन (दूसरी)तीसरा चरण — अस्त · वक्री होकर वापसी20 अक्टू॰ 202723 फ़र॰ 2028
    अवधि: 6 मार्च 2049 – 7 अप्रैल 2057
    शनि राशिचरणसेतक
    मकर (बारहवीं)पहला चरण — उदय6 मार्च 204910 जुल॰ 2049
    धनु (ग्यारहवीं)बाहर (वक्री कदम) · वक्री होकर वापसी10 जुल॰ 20494 दिस॰ 2049
    मकर (बारहवीं)पहला चरण — उदय4 दिस॰ 204925 फ़र॰ 2052
    कुंभ (पहली)दूसरा चरण — शिखर25 फ़र॰ 205214 मई 2054
    मीन (दूसरी)तीसरा चरण — अस्त14 मई 20542 सित॰ 2054
    कुंभ (पहली)दूसरा चरण — शिखर · वक्री होकर वापसी2 सित॰ 20545 फ़र॰ 2055
    मीन (दूसरी)तीसरा चरण — अस्त5 फ़र॰ 20557 अप्रैल 2057

    कुंभ राशि की शनि ढैया, 1950–2060

    (लघु पनौती) शनि का चंद्र से चौथी (कंटक शनि) या आठवीं (अष्टम शनि) राशि में लगभग ढाई वर्ष का गोचर है — साढ़ेसाती के विषयों का हल्का रूप।

    अवधि: 20 सितंबर 1950 – 21 अगस्त 1953 · अष्टम शनि (चंद्र से आठवीं राशि)
    शनि राशिचरणसेतक
    कन्या (आठवीं)ढैया की राशि में20 सित॰ 195025 नव॰ 1952
    तुला (नौवीं)बाहर (वक्री कदम)25 नव॰ 195224 अप्रैल 1953
    कन्या (आठवीं)ढैया की राशि में · वक्री होकर वापसी24 अप्रैल 195321 अग॰ 1953
    अवधि: 28 अप्रैल 1971 – 10 जून 1973 · कंटक शनि (चंद्र से चौथी राशि)
    शनि राशिचरणसेतक
    वृषभ (चौथी)ढैया की राशि में28 अप्रैल 197110 जून 1973
    अवधि: 4 नवंबर 1979 – 6 अक्टूबर 1982 · अष्टम शनि (चंद्र से आठवीं राशि)
    शनि राशिचरणसेतक
    कन्या (आठवीं)ढैया की राशि में4 नव॰ 197915 मार्च 1980
    सिंह (सातवीं)बाहर (वक्री कदम) · वक्री होकर वापसी15 मार्च 198027 जुल॰ 1980
    कन्या (आठवीं)ढैया की राशि में27 जुल॰ 19806 अक्टू॰ 1982
    अवधि: 7 जून 2000 – 7 अप्रैल 2003 · कंटक शनि (चंद्र से चौथी राशि)
    शनि राशिचरणसेतक
    वृषभ (चौथी)ढैया की राशि में7 जून 200023 जुल॰ 2002
    मिथुन (पाँचवीं)बाहर (वक्री कदम)23 जुल॰ 20028 जन॰ 2003
    वृषभ (चौथी)ढैया की राशि में · वक्री होकर वापसी8 जन॰ 20037 अप्रैल 2003
    अवधि: 10 सितंबर 2009 – 4 अगस्त 2012 · अष्टम शनि (चंद्र से आठवीं राशि)
    शनि राशिचरणसेतक
    कन्या (आठवीं)ढैया की राशि में10 सित॰ 200915 नव॰ 2011
    तुला (नौवीं)बाहर (वक्री कदम)15 नव॰ 201116 मई 2012
    कन्या (आठवीं)ढैया की राशि में · वक्री होकर वापसी16 मई 20124 अग॰ 2012
    अवधि: 8 अगस्त 2029 – 31 मई 2032 · कंटक शनि (चंद्र से चौथी राशि)
    शनि राशिचरणसेतक
    वृषभ (चौथी)ढैया की राशि में8 अग॰ 20295 अक्टू॰ 2029
    मेष (तीसरी)बाहर (वक्री कदम) · वक्री होकर वापसी5 अक्टू॰ 202917 अप्रैल 2030
    वृषभ (चौथी)ढैया की राशि में17 अप्रैल 203031 मई 2032
    अवधि: 22 अक्टूबर 2038 – 26 सितंबर 2041 · अष्टम शनि (चंद्र से आठवीं राशि)
    शनि राशिचरणसेतक
    कन्या (आठवीं)ढैया की राशि में22 अक्टू॰ 20385 अप्रैल 2039
    सिंह (सातवीं)बाहर (वक्री कदम) · वक्री होकर वापसी5 अप्रैल 203913 जुल॰ 2039
    कन्या (आठवीं)ढैया की राशि में13 जुल॰ 203929 जन॰ 2041
    तुला (नौवीं)बाहर (वक्री कदम)29 जन॰ 20415 फ़र॰ 2041
    कन्या (आठवीं)ढैया की राशि में · वक्री होकर वापसी5 फ़र॰ 204126 सित॰ 2041
    अवधि: 28 मई 2059 – 7 मार्च 2062 · कंटक शनि (चंद्र से चौथी राशि)
    शनि राशिचरणसेतक
    वृषभ (चौथी)ढैया की राशि में28 मई 205911 जुल॰ 2061
    मिथुन (पाँचवीं)बाहर (वक्री कदम)11 जुल॰ 206113 फ़र॰ 2062
    वृषभ (चौथी)ढैया की राशि में · वक्री होकर वापसी13 फ़र॰ 20627 मार्च 2062

    आप क्या कर सकते हैं — पहले बिना ख़र्च वाले उपाय

    “नुकसान से बचने” के लिए इनमें से कुछ भी ज़रूरी नहीं है। ये शनि काल में अपनाए जाने वाले पारंपरिक, अधिकतर निःशुल्क उपाय हैं, हर एक का स्रोत साथ में। कोई उपाय परिणाम की गारंटी नहीं देता।

    साढ़ेसाती (शनि के साढ़े सात वर्ष)
    आपके लिए इसका अर्थ

    शनि आपकी चंद्र राशि से पहले, उस पर, या उसके बाद की राशि में गोचर कर रहे हैं — लगभग साढ़े सात वर्ष का समय। यह धैर्य, नियमितता और लगातार प्रयास माँगता है; बहुत से लोग इसे वह समय मानते हैं जिसने उनकी सबसे मज़बूत नींव बनाई।

    यह कितना आम है? हर किसी की आती है — लगभग हर 30 वर्ष में, यानी जीवन में दो-तीन बार। किसी भी समय लगभग 4 में से 1 व्यक्ति साढ़ेसाती में होता है (चंद्र से गिनी 12 में से 3 राशियों में शनि)।

    यह अक्सर डर से हल्का क्यों होता है: जब शनि आपके लग्न के लिए मित्र या योगकारक हों (वृषभ और तुला लग्न के लिए शनि योगकारक हैं) या जन्म-कुंडली में अच्छे स्थित हों, तो इसे बहुत हल्का माना जाता है।

    आप क्या कर सकते हैं

    वैकल्पिक पारंपरिक उपाय — पहले निःशुल्क। कोई भी अनिवार्य नहीं, और कोई भी परिणाम की गारंटी नहीं देता।

    1. निःशुल्क, रोज़मर्रा के उपाय

    मंत्र
    शनि बीज मंत्र

    ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

    Om Praam Preem Praum Sah Shanaishcharaya Namah

    संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला); पारंपरिक पूर्ण जप संख्या 23,000 · कब: शनिवार शाम

    स्रोत: Navagraha beej mantra (traditional graha-japa manuals)
    नवग्रह स्तोत्र — शनि श्लोक

    नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

    Nilanjana samabhasam raviputram yamagrajam, chhaya martanda sambhutam tam namami shanaishcharam

    संख्या: दिन में एक या तीन बार — ग्रह के वार पर 11 या 108 बार पाठ भी प्रचलित है · कब: शनिवार

    स्रोत: Navagraha Stotra, attributed to Vyasa
    प्रार्थना / स्तोत्र
    • हनुमान चालीसा — प्रतिदिन एक बार, या मंगलवार और शनिवार को।स्रोत: Hanuman Chalisa — Goswami Tulsidas
    • राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र — शनिवार शाम को।स्रोत: Shani Stotra attributed to King Dasharatha (traditional recitation)
    व्रत (वैकल्पिक)
    • शनिवार व्रत। सामान्य रूप हल्का व्रत है (एक सादा भोजन, या फल और दूध)। व्रत वैकल्पिक है — गर्भावस्था, बीमारी, बुढ़ापे या दवा चलने पर इसे न करें; मंत्र और सेवा अपने आप में पर्याप्त हैं।स्रोत: Weekday (vara) vrat tradition — each weekday is ruled by its planet
    दैनिक अभ्यास
    • लगन और ईमानदारी से काम करें, समय के पाबंद रहें और जो शुरू करें उसे पूरा करें — यही शनि के अपने विषय हैं।स्रोत: Practical, constructive habit (no special source needed)
    • मज़दूरों, कर्मचारियों और बुज़ुर्गों के साथ न्याय और दया रखें। लाल किताब शराब से दूर रहने की सलाह भी देती है।स्रोत: Lal Kitab (folk remedy tradition)
    सेवा
    • मज़दूरों, बुज़ुर्गों, दिव्यांगों या गरीबों की सेवा करें — भोजन, सर्दी में कंबल, या अपना समय — विशेषकर शनिवार को।स्रोत: Lal Kitab (folk remedy tradition)

    2. दान

    • क्या: काले तिल, सरसों का तेल, काली उड़द दाल, काला वस्त्र या कंबल, लोहे की वस्तुएँ
      किसे: मज़दूरों, बुज़ुर्गों या गरीबों को, या शनि मंदिर में
      कब: शनिवार, शाम
      स्रोत: Navagraha daan tradition (graha-shanti practice)

    3. पूजा / हवन

    • शनि मंत्र के साथ पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक घर पर कर सकते हैं
      कब: शनिवार शाम
      स्वयं करें; पुरोहित की आवश्यकता नहीं।
      स्रोत: Popular graha–devata tradition (each planet paired with a deity)
    • हनुमान चालीसा / हनुमान पूजा घर पर कर सकते हैं
      कब: शनिवार और मंगलवार
      शनि काल में व्यापक रूप से पढ़ी जाती है।
      स्रोत: Hanuman Chalisa — Goswami Tulsidas
    • शनि ग्रह शांति (जप और हवन) पुरोहित आवश्यक
      कब: शनिवार या शनि जयंती (ज्येष्ठ अमावस्या), पुरोहित द्वारा चुना गया
      वैकल्पिक।
      स्रोत: Graha Shanti / Navagraha puja tradition (Parashari remedial practice, BPHS)

    4. परंपरा से जुड़े मंदिर

    दर्शन वैकल्पिक है। स्थान दिए गए स्रोतों से जाँचे गए हैं।

    • तिरुनल्लार दर्भारण्येश्वर मंदिर (शनीश्वरन)
      Thirunallar, Karaikal ज़िला, Puducherry (UT)
      शनि का नवग्रह मंदिर। इसका प्रमुख उत्सव "सनिपेयर्ची" तब मनाया जाता है जब शनि राशि बदलते हैं (लगभग हर ढाई साल)।
      स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org
    • शनि शिंगणापुर (शनि मंदिर)
      Shani Shingnapur (Nevasa taluka), Ahilyanagar (Ahmednagar) ज़िला, Maharashtra
      अपने शनि देव के स्थान के लिए प्रसिद्ध — स्वयंभू काले पत्थर के रूप में।
      स्रोत: en.wikipedia.org

    5. रत्न — सावधानी के साथ

    नीलम साढ़ेसाती का सामान्य उपाय नहीं है। इस पर तभी विचार होता है जब आपकी पूरी कुंडली स्वयं शनि का समर्थन करे — साढ़ेसाती पेज इसे केवल तभी दिखाता है — और तब भी योग्य ज्योतिषी की जाँच और थोड़े परीक्षण के बाद ही।

    योग्य ज्योतिषी से सलाह लें और पूरी कुंडली की जाँच के बाद ही रत्न पहनें। 18 वर्ष से कम आयु के किसी के लिए कभी नहीं। कम कीमत के उपरत्न भी होते हैं — उनके बारे में पूछें। परंपरा से नया रत्न पहले थोड़े समय परीक्षण के लिए पहना जाता है और ठीक न लगे तो उतार दिया जाता है। रत्न कभी पक्का समाधान नहीं है, और ऊपर दिए निःशुल्क उपायों में किसी रत्न की आवश्यकता नहीं।

    आपकी पूरी कुंडली के लिए कौन-सा रत्न (यदि कोई) उपयुक्त है, देखें →

    6. ज्योतिषी से कब मिलें

    अपनी साढ़ेसाती को दशा और लग्न के साथ पढ़वाना हो तो ज्योतिषी से मिलें — एक ही गोचर अलग-अलग कुंडलियों में बहुत अलग अनुभव होता है।

    ये पारंपरिक प्रथाएँ चिंतन और मन की शांति के लिए दी गई हैं — कभी पक्की नहीं, कभी अनिवार्य नहीं, और चिकित्सीय, कानूनी या आर्थिक सलाह नहीं। BornClock कोई पूजा या रत्न नहीं बेचता।

    पूरा उपाय पेज →
    शनि ढैया (लघु पनौती)
    आपके लिए इसका अर्थ

    शनि लगभग ढाई वर्ष के लिए आपकी चंद्र राशि से चौथी (कंटक) या आठवीं (अष्टम) राशि में हैं। चौथी को घर और काम की दिनचर्या स्थिर करने का, आठवीं को बदलाव और आत्म-चिंतन का समय माना जाता है। यह एक दौर है, कोई दंड नहीं।

    यह कितना आम है? आम है: किसी भी समय लगभग 6 में से 1 व्यक्ति के लिए शनि इन 2 राशियों (12 में से) में से एक में होते हैं।

    यह अक्सर डर से हल्का क्यों होता है: साढ़ेसाती की तरह, जब शनि आपके लग्न के लिए मित्र या योगकारक हों, या जन्म-कुंडली में अच्छे स्थित हों, तो इसे बहुत हल्का माना जाता है।

    आप क्या कर सकते हैं

    वैकल्पिक पारंपरिक उपाय — पहले निःशुल्क। कोई भी अनिवार्य नहीं, और कोई भी परिणाम की गारंटी नहीं देता।

    1. निःशुल्क, रोज़मर्रा के उपाय

    मंत्र
    शनि बीज मंत्र

    ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

    Om Praam Preem Praum Sah Shanaishcharaya Namah

    संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला); पारंपरिक पूर्ण जप संख्या 23,000 · कब: शनिवार शाम

    स्रोत: Navagraha beej mantra (traditional graha-japa manuals)
    नवग्रह स्तोत्र — शनि श्लोक

    नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

    Nilanjana samabhasam raviputram yamagrajam, chhaya martanda sambhutam tam namami shanaishcharam

    संख्या: दिन में एक या तीन बार — ग्रह के वार पर 11 या 108 बार पाठ भी प्रचलित है · कब: शनिवार

    स्रोत: Navagraha Stotra, attributed to Vyasa
    प्रार्थना / स्तोत्र
    • हनुमान चालीसा — प्रतिदिन एक बार, या मंगलवार और शनिवार को।स्रोत: Hanuman Chalisa — Goswami Tulsidas
    • राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र — शनिवार शाम को।स्रोत: Shani Stotra attributed to King Dasharatha (traditional recitation)
    व्रत (वैकल्पिक)
    • शनिवार व्रत। सामान्य रूप हल्का व्रत है (एक सादा भोजन, या फल और दूध)। व्रत वैकल्पिक है — गर्भावस्था, बीमारी, बुढ़ापे या दवा चलने पर इसे न करें; मंत्र और सेवा अपने आप में पर्याप्त हैं।स्रोत: Weekday (vara) vrat tradition — each weekday is ruled by its planet
    दैनिक अभ्यास
    • लगन और ईमानदारी से काम करें, समय के पाबंद रहें और जो शुरू करें उसे पूरा करें — यही शनि के अपने विषय हैं।स्रोत: Practical, constructive habit (no special source needed)
    • मज़दूरों, कर्मचारियों और बुज़ुर्गों के साथ न्याय और दया रखें। लाल किताब शराब से दूर रहने की सलाह भी देती है।स्रोत: Lal Kitab (folk remedy tradition)
    सेवा
    • मज़दूरों, बुज़ुर्गों, दिव्यांगों या गरीबों की सेवा करें — भोजन, सर्दी में कंबल, या अपना समय — विशेषकर शनिवार को।स्रोत: Lal Kitab (folk remedy tradition)

    2. दान

    • क्या: काले तिल, सरसों का तेल, काली उड़द दाल, काला वस्त्र या कंबल, लोहे की वस्तुएँ
      किसे: मज़दूरों, बुज़ुर्गों या गरीबों को, या शनि मंदिर में
      कब: शनिवार, शाम
      स्रोत: Navagraha daan tradition (graha-shanti practice)

    3. पूजा / हवन

    • शनि मंत्र के साथ पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक घर पर कर सकते हैं
      कब: शनिवार शाम
      स्वयं करें; पुरोहित की आवश्यकता नहीं।
      स्रोत: Popular graha–devata tradition (each planet paired with a deity)
    • हनुमान चालीसा / हनुमान पूजा घर पर कर सकते हैं
      कब: शनिवार और मंगलवार
      शनि काल में व्यापक रूप से पढ़ी जाती है।
      स्रोत: Hanuman Chalisa — Goswami Tulsidas
    • शनि ग्रह शांति (जप और हवन) पुरोहित आवश्यक
      कब: शनिवार या शनि जयंती (ज्येष्ठ अमावस्या), पुरोहित द्वारा चुना गया
      वैकल्पिक।
      स्रोत: Graha Shanti / Navagraha puja tradition (Parashari remedial practice, BPHS)

    4. परंपरा से जुड़े मंदिर

    दर्शन वैकल्पिक है। स्थान दिए गए स्रोतों से जाँचे गए हैं।

    • तिरुनल्लार दर्भारण्येश्वर मंदिर (शनीश्वरन)
      Thirunallar, Karaikal ज़िला, Puducherry (UT)
      शनि का नवग्रह मंदिर। इसका प्रमुख उत्सव "सनिपेयर्ची" तब मनाया जाता है जब शनि राशि बदलते हैं (लगभग हर ढाई साल)।
      स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org
    • शनि शिंगणापुर (शनि मंदिर)
      Shani Shingnapur (Nevasa taluka), Ahilyanagar (Ahmednagar) ज़िला, Maharashtra
      अपने शनि देव के स्थान के लिए प्रसिद्ध — स्वयंभू काले पत्थर के रूप में।
      स्रोत: en.wikipedia.org

    5. रत्न — सावधानी के साथ

    नीलम ढैया का सामान्य उपाय नहीं है — केवल तभी जब पूरी कुंडली शनि का समर्थन करे, योग्य ज्योतिषी की जाँच और थोड़े परीक्षण के बाद।

    योग्य ज्योतिषी से सलाह लें और पूरी कुंडली की जाँच के बाद ही रत्न पहनें। 18 वर्ष से कम आयु के किसी के लिए कभी नहीं। कम कीमत के उपरत्न भी होते हैं — उनके बारे में पूछें। परंपरा से नया रत्न पहले थोड़े समय परीक्षण के लिए पहना जाता है और ठीक न लगे तो उतार दिया जाता है। रत्न कभी पक्का समाधान नहीं है, और ऊपर दिए निःशुल्क उपायों में किसी रत्न की आवश्यकता नहीं।

    आपकी पूरी कुंडली के लिए कौन-सा रत्न (यदि कोई) उपयुक्त है, देखें →

    6. ज्योतिषी से कब मिलें

    ढैया को अपनी चल रही दशा और लग्न के साथ पढ़वाना हो तो ज्योतिषी से मिलें।

    ये पारंपरिक प्रथाएँ चिंतन और मन की शांति के लिए दी गई हैं — कभी पक्की नहीं, कभी अनिवार्य नहीं, और चिकित्सीय, कानूनी या आर्थिक सलाह नहीं। BornClock कोई पूजा या रत्न नहीं बेचता।

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    साढ़ेसाती से जुड़े प्रश्न — कुंभ

    कुंभ राशि की साढ़ेसाती कब शुरू और कब खत्म होती है?

    1950 से 2060 के बीच कुंभ राशि की साढ़ेसाती: 2 फ़रवरी 1961 – 7 मार्च 1969; 21 मार्च 1990 – 17 अप्रैल 1998; 24 जनवरी 2020 – 23 फ़रवरी 2028; 6 मार्च 2049 – 7 अप्रैल 2057। हर अवधि शनि के मकर में पहले प्रवेश से शुरू होकर मीन से अंतिम निकास पर खत्म होती है (भारतीय मानक समय)।

    कुंभ राशि पर शनि ढैया कब होती है?

    कंटक शनि (चौथी राशि): 28 अप्रैल 1971 – 10 जून 1973; 7 जून 2000 – 7 अप्रैल 2003; 8 अगस्त 2029 – 31 मई 2032; 28 मई 2059 – 7 मार्च 2062। अष्टम शनि (आठवीं राशि): 20 सितंबर 1950 – 21 अगस्त 1953; 4 नवंबर 1979 – 6 अक्टूबर 1982; 10 सितंबर 2009 – 4 अगस्त 2012; 22 अक्टूबर 2038 – 26 सितंबर 2041।

    साढ़ेसाती के तीन चरण क्या हैं?

    पहला चरण (उदय) — शनि मकर में; दूसरा चरण (शिखर) — शनि कुंभ में; तीसरा चरण (अस्त) — शनि मीन में। हर चरण लगभग ढाई वर्ष का होता है।

    तालिका में शनि बीच में बाहर जाकर वापस क्यों आते हैं?

    शनि हर वर्ष लगभग साढ़े चार महीने वक्री (उल्टी चाल में दिखते) रहते हैं। राशि की सीमा के पास वक्री होने पर वे कुछ महीनों के लिए पिछली राशि में लौट जाते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं — इसलिए एक ही अवधि में प्रवेश, निकास और दोबारा प्रवेश की अलग-अलग तारीखें दिखती हैं।

    क्या साढ़ेसाती हमेशा बुरी होती है?

    नहीं। हर व्यक्ति के जीवन में यह लगभग हर 30 वर्ष में आती है। यह ज़िम्मेदारी, अनुशासन और लगातार प्रयास का समय है; बहुत से लोग इसे वह दौर मानते हैं जिसने उनकी सबसे मज़बूत नींव बनाई। असर आपकी पूरी कुंडली और दशा पर भी निर्भर करता है।

    साढ़ेसाती में क्या उपाय करें?

    सबसे पहले बिना ख़र्च वाले उपाय: शनि मंत्र या हनुमान चालीसा का पाठ, शनिवार को सेवा और ज़रूरतमंदों की मदद, नियमित दिनचर्या और ईमानदार मेहनत। कोई उपाय अनिवार्य नहीं है और कोई भी परिणाम की गारंटी नहीं देता। रत्न केवल योग्य ज्योतिषी से पूरी कुंडली जँचवाने के बाद।

    ये तारीखें कैसे निकाली गईं

    हर तारीख वह क्षण है जब शनि राशि बदलते हैं — BornClock के अपने इंजन (सायन नहीं, निरयन; लाहिड़ी अयनांश — वही इंजन जो आपकी कुंडली बनाता है) से गणना, भारतीय मानक समय में। 1940 से 2071 तक शनि के सभी 112 राशि-परिवर्तन स्विस एफ़ेमेरिस से मिलाए गए; उसी लाहिड़ी पद्धति में सबसे बड़ा अंतर 19 मिनट है। द्रिक पंचांग की शनि गोचर तालिकाओं से भी 12 मिनट के भीतर मेल।

    अपनी चंद्र राशि नहीं पता, या अपनी जन्म-जानकारी से तारीखें देखनी हैं?

    दूसरी राशियों की साढ़ेसाती