We value your privacy 🍪

    We use cookies to enhance your browsing experience, serve personalized content, and analyze our traffic. By clicking "Accept All", you consent to our use of cookies. You can customize your preferences or reject non-essential cookies.

    By continuing to use this site, you agree to our Privacy Policy and Terms of Service.

    पंचांग

    आज का पंचांग — जयपुर

    बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

    🤖 यह अनुवाद मशीन-सहायता से किया गया है और मानव समीक्षा लंबित है। (machine-assisted translation — pending human review)

    या कोई भी जगह खोजें

    City search © OpenStreetMap contributors

    दिखाया जा रहा है जयपुर · बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 · स्थानीय समय IST (UTC+5:30)

    English: Panchang for Jaipur — किसी भी तारीख़ और किसी भी शहर के लिए →

    आज संक्षेप में

    बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को जयपुर में सूर्योदय 06:34 और सूर्यास्त 17:47 पर है। सूर्योदय के समय कृष्ण तृतीया तिथि (01:07 (अगले दिन) तक) और कृत्तिका नक्षत्र (13:27 तक) है। राहु काल 12:10–13:35 है; बुधवार को अभिजित मुहूर्त नहीं लिया जाता।

    आज ऐसा क्यों

    • जयपुर में सूर्योदय 06:34, सूर्यास्त 17:47 — इस पृष्ठ का हर समय स्थानीय दिन या रात का एक भाग है, इसलिए घड़ी का समय इसी शहर का अपना है।
    • चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र में, कृष्ण तृतीया — सूर्योदय के समय चंद्रमा की स्थिति से तिथि और नक्षत्र तय होते हैं; अमृत काल और वर्ज्यम् भी इसी से निकलते हैं।

    सूर्योदय के समय पंचांग के पाँच अंग

    • तिथि (चंद्र दिवस): कृष्ण तृतीया
      01:07 (अगले दिन) तक
    • नक्षत्र (चंद्रमा का तारा): कृत्तिका
      13:27 तक
    • योग: व्यतीपात
      07:19 तक
    • करण (तिथि का आधा भाग): वणिज
      14:37 तक
    • वार: बुधवार

    जयपुर में सूर्य

    • सूर्योदय: 06:34
    • सूर्यास्त: 17:47

    शुभ समय अनुकूल

    • ब्रह्म मुहूर्त: 04:52–05:43
      भोर से पहले का शांत समय — पूजा, ध्यान और पढ़ाई के लिए
    • अभिजित मुहूर्त: बुधवार को नहीं
      बुधवार को यह मुहूर्त दुर्मुहूर्त होता है
    • अमृत काल: 11:16–12:43
      दिन के नक्षत्र का शुभ भाग

    नया कार्य शुरू करने के लिए टालें सावधानी से

    नया कार्य शुरू करने के लिए पारंपरिक मार्गदर्शन — चल रहा कार्य जारी रख सकते हैं।

    • राहु काल: 12:10–13:35
    • गुलिक काल: 10:46–12:10
    • यमगण्ड: 07:58–09:22
    • दुर्मुहूर्त: 11:48–12:33
    • वर्ज्यम्: 03:57–05:24 (अगले दिन)

    दिन का चौघड़िया (सूर्योदय 06:34 → सूर्यास्त 17:47)

    • लाभ: 06:34–07:58
      शुभ
    • अमृत: 07:58–09:22
      शुभ
    • काल: 09:22–10:46
      नए कार्य के लिए टालें
    • शुभ: 10:46–12:10
      शुभ
    • रोग: 12:10–13:35
      नए कार्य के लिए टालें
    • उद्वेग: 13:35–14:59
      नए कार्य के लिए टालें
    • चर: 14:59–16:23
      सामान्य
    • लाभ: 16:23–17:47
      शुभ

    रात का चौघड़िया (सूर्यास्त → अगला सूर्योदय)

    • उद्वेग: 17:47–19:23
      नए कार्य के लिए टालें
    • शुभ: 19:23–20:59
      शुभ
    • अमृत: 20:59–22:35
      शुभ
    • चर: 22:35–00:11
      सामान्य
    • रोग: 00:11–01:47
      नए कार्य के लिए टालें
    • काल: 01:47–03:23
      नए कार्य के लिए टालें
    • लाभ: 03:23–04:59
      शुभ
    • उद्वेग: 04:59–06:35
      नए कार्य के लिए टालें

    आज से जुड़े प्रश्न

    आज जयपुर में तिथि क्या है?

    बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय (06:34) के समय कृष्ण तृतीया तिथि है, 01:07 (अगले दिन) तक। नक्षत्र कृत्तिका है, 13:27 तक।

    28 अक्टूबर 2026 को जयपुर में राहु काल कब है?

    राहु काल 12:10–13:35; गुलिक काल 10:46–12:10; यमगण्ड 07:58–09:22।

    जयपुर — स्थानीय मार्गदर्शिका

    प्रमुख मंदिर

    • गोविंद देव जी मंदिर — सिटी पैलेस परिसर के भीतर राधा-कृष्ण का मंदिर। स्रोत: Wikipedia
    • गलताजी — जयपुर से लगभग 10 किमी पूर्व में प्राचीन हिन्दू तीर्थ। स्रोत: Wikipedia

    यहाँ के ख़ास त्योहार

    • गणगौर — गौरी की प्रतिमा के साथ शोभायात्रा सिटी पैलेस की ज़नानी ड्योढ़ी से निकलती है; उत्सव होली के अगले दिन से 16 दिन चलता है। स्रोत: Wikipedia
    • जन्माष्टमी — गोविंद देव जी मंदिर के प्रमुख उत्सवों में से एक। स्रोत: Wikipedia
    • मकर संक्रांति — हज़ारों लोग स्नान के लिए गलताजी पहुँचते हैं। स्रोत: Wikipedia

    हर पंक्ति साथ दिए स्रोत से ली गई है। दर्शन और उत्सव के समय के लिए मंदिर या स्थानीय सूचना देख लें।

    इन शब्दों का अर्थ

    यह पंचांग कैसे बनता है

    पंचांग ("पाँच अंग") किसी दिन की तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार बताता है। ये पाँचों अंग स्थानीय सूर्योदय के समय पढ़े जाते हैं, और निरयण (लाहिड़ी अयनांश) सूर्य-चंद्र से गणना होते हैं — वही इंजन जो आपकी कुंडली के पीछे है।

    सूर्योदय-सूर्यास्त जयपुर के अक्षांश-देशांतर के लिए सूर्य की वास्तविक स्थिति से निकाले गए हैं। राहु काल, गुलिक और यमगण्ड दिन के आठ बराबर भागों में से एक-एक भाग हैं; अभिजित, दुर्मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त दिन या रात के पंद्रहवें भाग हैं; अमृत काल और वर्ज्यम् दिन के नक्षत्र के तय हिस्से हैं। समय निकटतम मिनट तक गोल किए गए हैं।

    View in English (Jaipur) → · शब्दकोश (Glossary) →

    कोई महत्वपूर्ण कार्य के लिए तिथि चुन रहे हैं? शुभ मुहूर्त खोजें।

    मुहूर्त खोजें →